Dard Shayari Dil Se..

हैलो मित्रों,
आप सब को बहुत बहूत धन्नवाद की अपन
मेरा इन्ना सारहा मुझ बहत सी मेल मिली जिन्मे
दार्ड भरी शायरी पसंद करते थे कब गया था। DOSTO के लिए
आप सब के लिए जाते हैं ये शायरी
आशा की है तुम तुम सब को पासंड आइगी

चहा था हम्ने जईस भुलया ना गया इस्तेमाल करते हैं,
झाकम दिल का लॉगऑन से छुपाया ना गया,
बेफ़ाफ़े के बाद भी मैं प्यार करती हूं,
बवेफा का इल्ज़ाम भी हम लोग हैं ना गया।

मेरा दिल मुझे चुपते है वू,
सामने आते ही नाज़ार झाकाते है वू,
बत कार्त अभी नहीं होती,
शुक्ला है जब भी मिलते है,
मुस्कुराए करने के लिए

आँखों के आजी कभी जाम नही है,
मोहब्बत में मुझे बिछुड़े दिलन कोआराम नहा आटा,
एई डेल टूडन वाल इटाना टू सोचा गरम,
टूटा हुआ दिल कैसे से काम नहीं है।

यूसेन भी हंस हंस कर बात करता है,
हम लोग भी हंस कर सब सेहन की,
रॉय भी नहीं अनखी साफगोई बराबर,
Uss woqt ख़ुदा ने हम बराबर रीहम की।

Dard -e- Dil Shayari…

Assalamualaikum। … .महल प्रथम बार अपना शर्ह भज रहीं हुन्,
उमीद है आप पास्क आये …
अगर ना पासंड आये टो बटाडेना …
दुआओं कि डार्कहास्ट ..

दाद दिल शायरी …

1) कैसे तुम्को भुल्लर जैन,
कैज़ केहेदिन अलविदा,
दिल ने दिल को भी जरने ना दीया,
तस्लेम न कर्साक खून जिगर हमारा ..
कभी दिल ने हूकु संझायला वाली होमे दीन को समझली .. **

2) वही मंजर वाही दंगल,
हम जोस दिल दर समाज बटे,
खेल रहीं थी खेल वो,
यूं तो वह बेतेहे ..

3) खेल में हमारे समाज के लिए हम,
और वफ़ाईन यूपीएस निसार कर बैत,
मकतोल भी हम माकसूद भी हू सैक ह्यू,
वो और हमी बेविक़ाकर कर बैट .. **

4) दिलमे एक आस उठी है ..,
Muhallik tasavuraat की मेहेक utthi है ..
काश तुम सब सच ना ​​गरम ..
ये फरियाद दिल से निकली है …
पन्ना मुहब्बत है आज भी ..

5) हमरी वफाओन की लश अभय है .. **
ऐश्श हैन बरता पाणि रहो अन्खिन है ..
बेजुबान दर्ड है चवत्ता ढीमेसी में धडकन मुझे ..
चहता है बेटाब हैमरी .. दीन रात मद्धम है .. *

Tujhako bhool jane ko roz ki koshish karta hoon…

तुजको बुल जेन को राज़ की कोशीत हूं
तुजको भौल जौन गा फायर बात से डर्टी हुन है
तारा दरवाजा जेन भी मुख्य बिरादत केर नही सक्ता
के बिन तेरे एक पाल में हज़ार बार मर्ते हुन
गम जयाई का मुंह सेहणा ही पारा लकिन
जब भी संस लाह हुँ तूजको यदा कर हुन।

New Dard Shayari SMS in Hindi

Dard Shayari

Hum yaad karein naa karein,
Unn ki yaad aa hi jaati hai,
Yeh kaisi kasak hai mohabbat ki,
Hum par sitam dhhaa hi jaati hai,
Wo naa aaye hain,naa aayenge kabhi,
Phir bhi in nigahon ko unn ka intezaar baki hai,
Zindagi to gayi ab meri unn ke saath,
Par unn ke saath beete palon ka khumaar baaki hai.